PiFiTV – Combining New Media Models

Wi-Fi Mesh

Wi-Fi, (802.11b/g) is a dStarTopologyeregulated medium in most countries. Most internet users are familiar with Wi-Fi networks and most mobile devices today come equipped with an inbuilt Wi-Fi adapter. Typically Wi-Fi is set up in a hub-and-spoke configuration, where one Wi-Fi hub provides connectivity to many clients. The hub acts as a gateway to process all traffic on the network and in order to communicate with peers on the network a user must go through the gateway. This is analogous to the service provider model of communications and Wi-Fi has a strong use case as a means to share a single internet connection between multiple users.

While Wi-Fi has predominantly been used as a means of last mile connectivity to service providers, most Wi-Fi enabled devices can also be used in peer to peer mode, i.e. to communicate directly with other devices, without the intervention of a service provider or gateway. This ability can be used to build a peer to peer based network topology called a mesh. A mesh network is different from a hub-and-spoke network in that there can be many paths between two points on the network. As a result, members of a mesh network share a peer or peer-like relationship.Mesh
The Internet itself is a mesh of meshes as it does not depend on any single service provider and service providers become peers from the point of view of the internet. Reducing costs of Wi-Fi equipment and new developments in networking software have made it possible to build low cost, community owned and operated mesh networks and lately this form of network is becoming a popular alternative to the cloud, particularly for low income and rural communities Multiple meshes can be connected to each other and to the internet in innovative ways such as physical transfer of bulk data (Data Muling) and by pooling low bandwidth connections available on the mesh.


The RaspberryPi is a USD35 single board computer. The Pi comes with 512 MB of RAM and a 1GHz processor, making it comparable in performance to a netbook or a cheap desktop computer.
The Pi is more than adequate forPiImage

  • Basic web browsing
  • Multimedia Access
  • Basic Knowledge processing tasks

The Pi can use an HDMI or S-Video interface for a display, meaning that it can even be connected to old CRT based TV sets, which are quite popular in rural and urban low income households. With a USB Wi-Fi adapter and a keyboard, the Pi can convert any TV into a PiFiTV

Components and interactions on the PiFiTV network

The following components and interactions are possible in a community owned wireless mesh scenario











PiFiTV Features

The PiFiTV model holds the possibility of putting even rural and low income user groups at par with users of high end interactive television. PiFiTV can use even basic CRT based television sets over the S-Video channel besides supporting newer high definition TVs via HDMI. Moreover, the RaspberryPi is a low power device (5V, 1A) and can even be powered with a cheap solar panel, adding almost no extra cost to the household’s power budget. The addition of a simple wireless mouse makes the Pi a two way interaction device, where users can not only select the program they want to watch but also interact with it if the content is so designed. With a battery operated speaker, can be used as a Wi-Fi radio during power cuts. We are currently exploring the feasibility of using low power display devices such as pico projectors as well. From a provider standpoint, the PiFiTV model is similar to the local cable operator model recently phased out by digital cable, combined with the possibility of multiple content providers on the same network. This means significantly lower content hosting and dissemination costs for providers since the underlying network is relatively small scale, community owned and entails a lower over-all cost of operation. In fact any provider can join the network as a peer and host content by simply operating or sponsoring the operation of some member devices.


We are very keen to partner with content providers such as independent artists, writers, bloggers, performers and other interested parties who are keen to acquire a user segment in areas beyond the pale of connectivity Partners are welcome to engage with us by

  • Wholly or partly supporting community Wi-Fi network build outs in low/no connectivity areas
  • Providing content for delivery on Wi-Fi networks that we are already setting up through one of our existing partners
  • Visiting the deployment zone and conducting agenda/content specific workshops that have a clear follow on the network
  • We are also open to other interesting ideas for collaboration

Proof of Concept

We are working on a project in collaboration with Janastu हैकरgram to build and test a Community Owned Wi-Fi mesh network connecting 5 villages in the Devarayanadurga area in Karnataka. The project is called COWDev and is supported by the Open Technology Fund. The region is interesting as it has a large underserved population in terms of connectivity, owing to its position inside a forest reserve where getting permissions to set up cell phone towers is hard. We are keen to focus on women and young people as primary users and operators of this network PiFiTV is one of the key services we will be piloting on this network.

The initial PiFiTV demo system is set up at the residence of Renu and Mukunda Rao ji of Janastu, who have been living among the community in Hale Kote (one of the villages in the region) for a number of years. Janastu is the host organization and community connect partner for हैकरgram at Hale Kote.

साइबर स्वराज – ट्राइ को जवाब देने में हमारी मदद करें!

पिछ्ले हफ़्ते हमने ट्राइ एवं टेलिकाम कम्पनियों द्वारा साइबर स्वराज पर किये जा रहे आक्रमण के सन्दर्भ में लिखा था.

विदीशा से सुर्य प्रताप सिंह चौहान नें हमें उस पोस्ट का हिन्दी अनुवाद भेजा है| कृपया इसे सभी के साथ साझा कर ट्राइ को करारा जवाब देने में इन्टरनेट समुदाय की सहायता करें! –

27 मार्च 2015 को, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ओवरटॉप ( टी टी) सेवाओं के लिए नियामक ढांचाशीर्षक से एक परामर्श पत्र प्रकाशित हुआ था। ट्राई के अनुसार, “ टी टी का सबसे अच्छा ज्ञात उदाहरण हैं, स्नैपचैट, इंस्टाग्राम, किक, गूगल टॉक, हाईक, लाइन, वीचैट, टैंगो, स्काइप, वाइबर, व्हाट्सप्प, चैट ओन ईकॉमर्स साइटों (अमेज़न, फ्लिपकार्ट आदि), ओला , फेसबुक मैसेंजर, ब्लैक बेरी मैसेंजर, आईमैसेज, ऑनलाइन वीडियो गेम और फिल्मों (नेटफ्लिक्स, पैंडोरा)

जैसा की आप समझ सकते हैं, इन सेवाओं को विनियमित करना लोकप्रिय इंटरनेट के सबसे बड़े हिस्से को विनियमित करने के समान है।

ट्राई के परामर्श के लिए निम्नलिखित सवाल उठाया गया है। हम उन्हें सहर्ष अपने दोस्तों के विचारों का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार हैं। इसलिए हम हर किसी को आमंत्रित कर रहे हैं कि

1. यहाँ खबर पढ़ें – http://trai.gov.in/WriteReaddata/ConsultationPaper/Document/ टी टी -CP-27032015.pdf या यहाँ MediaNama द्वारा एक सरलीकृत संस्करण पढ़ें – http://www.medianama.com/2015/03/223-should-india-have-licensing-of-internet-services-net-neutrality-trai-wants-your-views

2. सवाल पूछें। आप mojolab.org पर अर्जुन को लिख सकते हैं एवं फेसबुक या ट्विटर या किसी अन्य माध्यम द्वारा हम तक पहुँच सकते हैं। आप भी इस पोस्ट या Medianama पर टिप्पणी कर सकते हैं हम अपनी तरफ से सबसे अच्छा जवाब देने कि कोशिश करते हैं।

3.विचार विमर्श करने के बाद आप निम्नलिखित प्रश्नो पर अपनी प्रतिक्रियाएं संक्षेप में दें। हम आपकी प्रतिक्रिया साँझा करते हुए कोशिश करेंगे कि एक मुख्या प्रतिक्रिया ट्राई के पास ले जाएं। हम भी ऐसे दोस्त खोज रहे हैं जो हमें वापस प्रतिक्रिया पाने में मदद करेंगे। यह वेब्साइट जवाब भेजने में मदद कर सकती है http://savetheinternet.in

और ये सब हमे 25 अप्रैल से पहले ही करना है क्यूंकि उसके बाद वो हमारी प्रतिक्रिया पर ध्यान देना बंद कर देंगे!

प्रश्न 1: क्या ये ओ टी टी सेवाओं के लिए नियामक ढांचा स्थापित करने के लिए ज्यादा जल्दी है, क्यूंकि इंटरनेट पैठ अभी भी विकसित हो रहा है, एक्सेस स्पीड आमतौर पर काम ही आ रही है और उच्च गति ब्रॉडबैंड की देश में सीमित कवरेज है? या फिर, शुरुआत करनी चाहिए विनियामक ढांचे के साथ जो की भविष्य में परिवर्तन करने के लिए अनुकूलित किया जा सकता है? औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 2: क्या ओ टी टी उपभोगता के संचार की पेशकश के अनुप्रयोगों (निवासी या तो देश में या बाहर) के माध्यम से सेवाओं (आवाज, मैसेजिंग और वीडियो कॉल सेवाएं) को लायसेंसिंग शासन के तहत लाया जाए? औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 3: क्या ओ टी टी की वृद्धि TSPs के पारंपरिक राजस्व स्ट्रीम को प्रभावित कर रही है? यदि हां, तो क्या TSPs के डाटा राजस्व में वृद्धि इस प्रभाव के लिए क्षतिपूर्ति करने के लिए पर्याप्त है? औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 4: क्या टी टी चलाने वालों को TSPs नेटवर्क का प्रयोग करने के लिए डेटा शुल्क से अधिक एवं अतिरिक्त भुगतान करना चाहिए ? यदि हाँ तो क्या शुल्क दर निर्धारित की जानी चाहिए? क्या इस तरह के विकल्पों में बैंडविड्थ खपत का शुल्क जोड़ा जाना चाहिए? क्या शुल्क दरों को उत्पाद/सेवा में पृथक करने का माध्यम बनाया जा सकता है? औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 5: क्या आप मानते हैं किन ओ टी टी चलाने वालों के विनियामक पर्यावरण में अंतर है? यदि हां, तो क्या किया जाना चाहिए इन मुद्दों का समाधान करने के लिए? प्रचिलित कानूनो एवं विनियमों को ओ टी टी चलाने वालों (जो 114 आभासी दुनिया में सञ्चालन करते हैं) के ऊपर किस प्रकार लागु किया जाये एवं अनुपालन कराया जायेइसका अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव हो सकता है? औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 6 : संचार सेवाएं प्रदान करते हुए ओ टी टी चलाने वालों के सम्बन्ध में सुरक्षा चिंताओं को कैसे सम्भोदित किया जाना चाहिए? ओ टी टी चलाने वालों को, डेटा रिकॉर्ड बनाये रखना एवं लॉग्स आदि जैसी कौनसी सुरक्षा की स्थिति अनिवार्य की जानी चाहिए? और किस प्रकार इन परिश्थितियों का अनुपालन किया जा सकता है यदि इस प्रकार के ओत्त चलाने वालों की गतिविधियाँ देश के बाहर हैं? औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 7: ओ टी टी चलाने वालों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली एप्लीकेशन सेवाओं की सुरक्षा, देखरेख एवं गोपनीयता उपभोगताओं के लिए किस प्रकार सुनिश्चित की जाये? वे उपभोगता हिट की सुरक्षा को कैसे सुनिश्चित करें? औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 8: पद 4.23 से सम्बंधित अथवा पद 4.29 में संछिप्त सर्वोत्तम कार्य प्रणाली, भारत में ओ टी टी के लिए विनियामक ढांचे के लिए ETNO से किस प्रकार प्रस्ताव लाया जा सकता है? और क्या प्रथाएं नियामक फिएट द्वारा निषिद्ध की जानी चाहिए? औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 9: भारतीय प्रसंग में नेट टतस्थता पर आपके क्या विचार हैं? पद 5.47 में विचार विमर्श किये गए विभिन्न सिद्धांतो से कैसे निपटा जा सकता है? औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 10: किस प्रकार के भेदभाव या यातायात प्रबंधन व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ मेल खाती एवं उचित है? किस कार्य की आज्ञा दी जा सकती है? औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 11: क्या TSPs को विभिन्न टी टी ऍप्लिकेशन्स के लिए प्रयोग होने वाली विभिन्न यातायात प्रबंधन तकनीक का प्रकाशन अनिवार्य कर देना चाहिए? क्या यह पारदर्शिता और निष्पक्ष विनियामन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त परिस्थिति है?

प्रश्न 12: कैसे अनुकूल और संतुलित पर्यावरण बनाया जाये ताकि त्स्प्स नेटवर्क बुनियादी ढांचे में निवेश करने में सक्षम हो एवं कैप्स नया ढंग निकलने एवं विकसित होने में सक्षम हो सके? नेटवर्क उन्नयन लागत किसे वहां करनी चाहिए? औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 13: क्या TSPs को सेवाओं के गैर दर आधारित भेदभाव को लागु करने की अनुमति देनी चाहिए? यदि हाँ तो किन हालत के तहत इस प्रकार के व्यवहार स्वीकार्य हैं? क्या प्रतिबंध, यदि कोई हो, करने की आवश्यकता है यदि इस तरह के उपायों के साथ दुर्व्यवहार रोकना हो? क्या उपाय

उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अपनाया जाना चाहिए? कृपया

औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 14: क्या डेटा एक्सेस एवं टी टी संचार सेवाओं की भिन्न दरों को अनुमति देने का औचित्त्य है ? यदि हाँ, तो क्या परिवर्तन वर्तमान टैरिफ एवं देश की दूरसंचार सेवाओं के लिए नियामक ढांचे में लाने की जरुरत है? औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 15: क्या ओ टी टी संचार सेवा चलाने वालों को दूरसंचार सेवा के बल्क उपयोगकर्ता के रूप में देखा जाना चाहिए? रूपरेखा को किसी भेदभाव को रोकने और हितधारक की रक्षा के लिए किस प्रकार संरचित किया जाना चाहिए? औचित्य के साथ टिप्पणी दें।

प्रश्न 16: भारत विशिष्ट टी टी एप्लीकेशन प्रोत्साहित करने के लिए क्या रूपरेखा अपनायी जानी चाहिए? औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 17: यदि ओ टी टी संचार सेवा चलाने वालों को लाइसेंस धारक बनाया जाये तो उन्हें ASP वर्गीकृत किया जाये अथवा CSP? यदि ऐसा है तो क्या ढांचा होना चाहिए? औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 18क्या टी टी संचार सेवाओं के लिए सदस्यता शुल्क को विनियमित करने की जरूरत है? औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 19: गैरसंचार ओ टी टी चलाने वालों के नियमन के लिए सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए? कृपया औचित्य के साथ टिप्पणी करें।

प्रश्न 20: क्या अन्य मुद्दे हैं जिनका चर्चा किये गए विषय पर प्रभाव है?

NetNeutrality – Help us write a response to TRAI!

On 27th March 2015, the Telecom Regulatory Authority of India came out with a consultation paper titled “Regulatory Framework for Over-the-top (OTT) services”. According to TRAI, “The best known examples of OTT are Skype, Viber, WhatsApp, Chat On, Snapchat, Instagram, Kik, Google Talk, Hike, Line, WeChat, Tango, ecommerce sites (Amazon, Flipkart etc.),Ola, Facebook messenger, Black Berry Messenger, iMessage, online video games and movies (Netflix, Pandora). ”

As you can understand, considering regulating these services is tantamount to regulating most of the popular Internet.

TRAI has raised the following questions for consultation. We would love to give them a response that represents the views of our friends. We are therefore inviting everyone to

1. Read the paper here – http://trai.gov.in/WriteReaddata/ConsultationPaper/Document/OTT-CP-27032015.pdf or a simplified version by MediaNama here – http://www.medianama.com/2015/03/223-should-india-have-licensing-of-internet-services-net-neutrality-trai-wants-your-views

2. Ask questions – you can write to arjun at mojolab dot org or reach us via Facebook or Twitter or any other way you like to ask questions. You can also comment on this post or Medianama’s. We will try and answer as best as we can.

3. After you’re done thinking, give us your responses on the following questions as briefly as you can. We will share your responses and try and get a representative response back to TRAI. We’re also looking to find friends who will help get responses back .

And we have to do all this before April 25th, because that’s when they stop listening!


Question 1: Is it too early to establish a regulatory framework for
OTT services, since internet penetration is still evolving, access
speeds are generally low and there is limited coverage of high-speed
broadband in the country? Or, should some beginning be made now
with a regulatory framework that could be adapted to changes in the
future? Please comment with justifications.

Question 2: Should the OTT players offering communication
services (voice, messaging and video call services) through
applications (resident either in the country or outside) be brought
under the licensing regime? Please comment with justifications.

Question 3: Is the growth of OTT impacting the traditional revenue
stream of TSPs? If so, is the increase in data revenues of the TSPs
sufficient to compensate for this impact? Please comment with

Question 4: Should the OTT players pay for use of the TSPs network
over and above data charges paid by consumers? If yes, what pricing
options can be adopted? Could such options include prices based on
bandwidth consumption? Can prices be used as a means of
product/service differentiation? Please comment with justifications.

Question 5: Do you agree that imbalances exist in the regulatory
environment in the operation of OTT players? If so, what should be
the framework to address these issues? How can the prevailing laws
and regulations be applied to OTT players (who operate in the 114
virtual world) and compliance enforced? What could be the impact
on the economy? Please comment with justifications.

Question 6: How should the security concerns be addressed with
regard to OTT players providing communication services? What
security conditions such as maintaining data records, logs etc. need
to be mandated for such OTT players? And, how can compliance
with these conditions be ensured if the applications of such OTT
players reside outside the country? Please comment with

Question 7: How should the OTT players offering app services
ensure security, safety and privacy of the consumer? How should
they ensure protection of consumer interest? Please comment with

Question 8: In what manner can the proposals for a regulatory
framework for OTTs in India draw from those of ETNO, referred to in
para 4.23 or the best practices summarised in para 4.29? And, what
practices should be proscribed by regulatory fiat? Please comment
with justifications.

Question 9: What are your views on net-neutrality in the Indian
context? How should the various principles discussed in para 5.47
be dealt with? Please comment with justifications.

Question 10: What forms of discrimination or traffic management
practices are reasonable and consistent with a pragmatic approach?
What should or can be permitted? Please comment with

Question 11: Should the TSPs be mandated to publish various traffic
management techniques used for different OTT applications? Is this
a sufficient condition to ensure transparency and a fair regulatory

Question 12: How should the conducive and balanced environment
be created such that TSPs are able to invest in network
infrastructure and CAPs are able to innovate and grow? Who should
bear the network upgradation costs? Please comment with

Question 13: Should TSPs be allowed to implement non-price based
discrimination of services? If so, under what circumstances are
such practices acceptable? What restrictions, if any, need to be
placed so that such measures are not abused? What measures
should be adopted to ensure transparency to consumers? Please
comment with justifications.

Question 14: Is there a justification for allowing differential pricing
for data access and OTT communication services? If so, what
changes need to be brought about in the present tariff and
regulatory framework for telecommunication services in the
country? Please comment with justifications.

Question 15: Should OTT communication service players be treated
as Bulk User of Telecom Services (BuTS)? How should the framework
be structured to prevent any discrimination and protect stakeholder
interest? Please comment with justification.

Question 16: What framework should be adopted to encourage Indiaspecific
OTT apps? Please comment with justifications.

Question 17: If the OTT communication service players are to be
licensed, should they be categorised as ASP or CSP? If so, what
should be the framework? Please comment with justifications.

Question 18: Is there a need to regulate subscription charges for
OTT communication services? Please comment with justifications.

Question 19: What steps should be taken by the Government for
regulation of non-communication OTT players? Please comment
with justifications.

Question 20: Are there any other issues that have a bearing on the
subject discussed?

Top 10 Reasons why TRAI should allow telcos to charge more for OTT services like Skype

Since last November, we’ve been hearing buzzing noises about “OTT services” being “preferentially charged” by telcos. What this means in plainspeak is that if you make a call using Skype, believing that it’s “free“, you could actually end up being charged more by your telecom provider than if you had made the call by phone. This move by the telcos comes as no surprise, at least to people who understand that someone is as likely to give you free communication as they are to give you free beer or a free lunch.

From the telecom providers point of view, revenues that were earlier available through international calling are now being eaten into by services like Skype and they are simply trying their best to put up a fight.

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PeopleTech Internships

arjuntcpp11The Mojolab Foundation is very happy to announce the PeopleTech Internships in  partnership  with ह��रgram, Janastu and Servelots. These internships are intended to provide students enrolled in professional courses such as engineering and management with an opportunity to apply their learning to social change and impact challenges in the real world. We are seeking applications from interested students both in groups as well as individuals. A descriptive document is attached . Interested students may also apply by filling out the embedded form below.

People Tech Internships

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